Murli Poems in Hindi

आज की मुरली से कविता (Poem made from today's murli of Shiv baba) - Daily updated. Poems from Brahma Kumar Mukesh bhai (Rajasthan, India). If you have a query or for old poems, contact BK Mukeshbkmukesh1973@gmail.com

 

Below is date wise murli poems for past 3 days. For old murlis, to download/print, visit Murli Poems PDF

 Murli poem 01

* ब्रह्मा बाबा के स्मृति दिवस पर कविता *

 

संस्कार बड़े ही सुन्दर लेकर वो दुनिया में आया

उसकी रूहानी छवि देखकर मन सबका हर्षाया

 

बढ़ती उम्र के संग उसकी आभा भी बढ़ती गई

प्रति दिन उसकी रहानी सुन्दरता निखरती गई

 

श्रेष्ठ कर्म करते रहकर उसने जीवन किया महान

हर किसी को लगने लगा वो चलन से देव समान

 

रूहानी सुन्दरता का ये राज उससे पूछा ना गया

उसकी छवि को निहारे बिना हमसे रहा ना गया

 

जान लिया हमने ये है शुद्ध संकल्पों का कमाल

इसीलिए उसने बनाया हर आत्मा को खुशहाल

 

उम्र भले झलके चेहरे पर फिर भी वो आकर्षक

हर पल हम उसको निहारते बनकर मूक दर्शक

 

उसके एक एक कर्म देखकर हुआ हमें एहसास

कैसे किया होगा उसने अपने चरित्र का विकास

 

बातों ही बातों में कोई आदि देव नहीं बन जाता

करके गहन तपस्या वो खुद को पूरा ही तपाता

 

योगाग्नि से वो बनकर निकला कुन्दन के समान

इसीलिये तो कहलाया अपना ब्रह्मा बाबा महान

 

तन से बूढ़ा होकर भी सदा बैठा होकर सावधान

जीवन से मिटाया जिसने माया का नाम निशान

उसकी वृत्ति दृष्टि भावना में था कल्याण समाया

सबके लिए खुद को विश्व कल्याणकारी बनाया

 

पवित्रता को उसने अपना मूल व्यक्तित्व बनाया

पवित्रता के बल पर ही पहले नम्बर में वो आया

बाप होकर भी जिसने किया बच्चों का सम्मान

नहीं था जिसके भीतर अहंकार का नाम निशान

 

अलौकिक जन्म देकर माँ का पार्ट भी निभाया

छत्र छाया बनकर उसने सबको दिल में बसाया

 

बच्चों की हर कमी कमजोरी को उसने समाया

श्रीमत देकर उसने हर मुश्किल को पार कराया

 

एकान्तप्रिय होकर भी बाबा थे सदा मिलनसार

श्रेष्ठ व्यवहार से किया अपकारी पर भी उपकार

 

किया जिसने निराकारीपन का पक्का अभ्यास

यादों में बसाया था जिसने शिव को श्वासों श्वास

 

ईश्वरीय मत को जिसने हृदय से किया स्वीकार

निश्चय बुद्धि बनकर पाया विजय माला का हार

 

पुरुषार्थ की गति बढ़ाकर कर्मातीत स्थिति पायें

इस वर्ष अपने आपको ब्रह्मा बाप समान बनायें

 

*ॐ शांति*

 

Murli poem 02

मुरली कविता दिनांक 16.01.2020 *

अच्छे मार्क्स से उत्तीर्ण होने का पुरूषार्थ करना

चुस्ती बनाए रखना तुम सुस्ती धारण ना करना

 

पुरुषार्थ में चुस्ती तुमको अच्छे मार्क्स दिलाएगी

सुस्ती आने पर मित्र संबंधियों की याद आएगी

 

सबका भाग्य बनाने के खुद को निमित्त बनाओ

तन मन धन सफल कर अपनी तक़दीर बनाओ

 

तक़दीर बनाने वाला केवल शिव बाबा भगवान

कृष्ण का नहीं इस कार्य में बच्चों कोई योगदान

 

अनेक जन्मों के अंत के भी अंत में बाबा आते

गीता ज्ञान सुनाकर हम सबकी तक़दीर जगाते

 

शरीर रूपी दुम भुलाकर कर्मातीत बनते जाओ

बाप के सिवाय किसी को तुम बुद्धि में न लाओ

 

श्रीमत पर खुद को खुदाई खिदमतगार बनाओ

तन मन धन सफल कर ऊंची तकदीर बनाओ

 

आनेस्टी से बाप के आगे खुद को लेकर जाओ

इसी विधि द्वारा चढ़ती कला का अनुभव पाओ

 

मनमत और परमत पर बाप के आगे न आओ

जैसे बाप सच्चे वैसे ही खुद को सच्चा बनाओ

 

सर्वस्व त्याग को अपने जीवन का अंग बनाओ

सच्चे तपस्वी का टाइटल इसी विधि से पाओ

* ॐ शांति *

 Murli poem 03

* मुरली कविता दिनांक 28.12.2019 *

 

केवल हम बच्चों ने ड्रामा के श्रेष्ठ ज्ञान को पाया

ड्रामा हूबहू दोहराता होता हुआ नजर हमें आया

 

धन कमाने का बच्चों रॉयल धन्धा ही अपनाओ

विकारी बनाने वाला कोई धन्धा नहीं अपनाओ

 

बाप को याद करते थे लेकिन पहचान नहीं पाए

हम कौन और बाप कौन खुद बाप बताने आए

 

अब तक बच्चों तुम आसुरी मत पर चलते आए

श्रीमत देकर बाप हमें सम्पत्तिवान बनाने आए

 

माया करेगी सामना तुम बिलकुल ना घबराओ

विजय तुम्हारी होगी बाप को याद करते जाओ

 

अविनाशी ज्ञान रत्नों का तुम धन्धा करते जाओ

21 जन्म के लिए पद्मापद्म भाग्य बाप से पाओ

 

याद की यात्रा में रह सृष्टि को सद्गति में पहुंचाओ

बाप की श्रीमत पर सबको आप समान बनाओ

 

माया कला रहित ना बनाए सावधान हो जाओ

विकारों की उत्पत्ति वाला धन्धा छोड़ते जाओ

 

शुभ भावना शुभ कामना का सहयोग है महान

इसी सहयोग से सफलता मिलनी होती आसान

 

यही सहयोग वायुमण्डल को शक्तिशाली बनाता

आत्माओं को बदलकर सफलता सम्पन्न बनाता

 

हर कदम में पदमों की कमाई जमा करते जाओ

कमाई करते हुए सबसे बड़े धनवान बन जाओ

 

* ॐ शांति *

*Thought for Today*

Prajapita Brahma Kumaris Ishwariya Vishwa Vidhyalaya

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